Home भदोही भदोही लोकसभा: अखिलेश के समाजवाद पर भारी पड़ रहा रमाकांत का यादववाद

भदोही लोकसभा: अखिलेश के समाजवाद पर भारी पड़ रहा रमाकांत का यादववाद

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हमार पूर्वांचल
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यादवों की पहली पसंद बन रहे आजमगढ़ के बाहुबली रमाकांत यादव

भदोही। उत्तरप्रदेश में भाजपा को हराने का ख्वाब देखकर सपा बसपा का बना गठबंधन भदोही लोकसभा में फेल होता दिखायी दे रहा है। यहां पर अखिलेश का समाजवाद रमाकांत यादव के यादव पर भारी पड़ता नजर आ रहा है जो गठबंधन के प्रत्याशी को झटका दे सकता है।

गौरतलब हो कि भदोही लोकसभा में सपा बसपा गठबंधन ने बसपा के चुनाव चिंह पर पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्र को चुनाव मैदान में उतारा है। जातीय समीकरण को देखते हुये पार्टी को उम्मीद थी कि दलित, मुस्लिम और यादव वोट यदि इकठ्ठा होती है तो यह सीट बसपा के खाते में चली आयेगी। किन्तु सपा का गढ़ माने जाने वाली भदोही के सपाईयों को पार्टी का यह फैसला रास नहीं आ रहा था। भले ही सपाई बसपा के प्रचार प्रसार में लगे थे किन्तु उन्हें कही न कही यह पीड़ा भी रही कि यदि यहां से बसपा जीत भी जाती है तो सपा के नेताओं का वजूद समाप्त हो जायेगा।

इसी दौरान कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक चाल खेलते हुये आजमगढ़ के बाहुबली यादव नेता रमाकांत यादव को टिकट दे दिया जिससे भदोही में यादवों को संजीवनी मिल गयी। कहा जाता है कि रमाकांत यादव सवर्ण विरोधी छवि रखने के साथ पिछड़ी जाति विशेषकर यादव समाज के प्रति समर्पित रहे हैं। यहीं वजह है कि यादव समाज उनके प्रति निष्ठा रखता है। गौर करने वाली बात यह भी है कि भदोही आने के पहले दिन ही ब्राह्मणों के खिलाफ जहर उगलकर पिछड़ों के उस दर्द को सहला दिया जो उनके समाज का एक नेता न होने का था।

सपा नेता शिवकरन यादव के निधन के बाद भदोही का यादव समाज अपना एक नेता पाने के लिये तरस रहा था। यादव समाज चाहता था कि उनके समाज का भी कोई ऐसा नेता हो जो उनकी आवाज को दबंगई से रख सके। उनके अधिकारों के लिये लड़ सके। हालांकि शिवकरन यादव सिर्फ यादव समाज के ही नहीं बल्कि एक सर्वमान्य नेता थे जिनकी पैठ सभी समाज में थी। किन्तु रमाकांत यादव को समाज का बाहुबली नेता माना जाता है जो अपने हक कें लिये किसी भी स्तर पर जा सकते हैं।

यहीं वजह है कि रमाकांत यादव के आने के बाद भदोही के यादव समाज में एक नई उर्जा का संचार देखा जा रहा है। जो समाज कई वर्षों से अपनी जाति के एक दबंग नेता की आस संजोये इंतजार में था उसकी उम्मीद पूरी होती दिखायी दे रही है। इसीलिये वर्षों से सपा का झंडा उठाने वाले रमाकांत यादव के चुनाव प्रचार में देखे जा रहे हैं। रमाकांत के आने के बाद लोगों में यह चर्चा आम हो गयी है कि भदोही में अखिलेश का समाजवाद रमाकांत के यादववाद पर फीका पड़ गया है।

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