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मुंबई लोकल ट्रेन में दशहरा: पटरियों पर दौड़ती अनूठी ‘आयुध पूजा’ और उत्सव का रंग

Devi Photo on Train

मुंबई लोकल ट्रेन को सिर्फ एक परिवहन व्यवस्था कहना गलत होगा; यह इस महानगरीय शहर की असली ‘लाइफलाइन’ है। रोजाना लाखों लोगों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने वाली इन ट्रेनों का मुंबईकरों के जीवन में एक बेहद खास स्थान है। यही कारण है कि जब देश भर में दशहरा (विजयादशमी) का त्योहार मनाया जाता है, तो मुंबई की लोकल ट्रेनों में भी एक अनूठा और अद्भुत उत्सव देखने को मिलता है। पटरियों पर दौड़ती इन ट्रेनों में श्रद्धा, कृतज्ञता और उत्सव का यह संगम पूरी दुनिया में बेमिसाल है।

लोकल ट्रेन और आयुध पूजा का संबंध

दशहरे के पावन अवसर पर सनातन परंपरा के अनुसार ‘आयुध पूजा’ यानी शस्त्रों, उपकरणों और मशीनों की पूजा करने का विधान है। मुंबईकरों के लिए लोकल ट्रेन से बड़ी और महत्वपूर्ण कोई मशीन नहीं है। इसलिए, इस दिन यात्री और रेलवे कर्मचारी मिलकर अपनी इस लाइफलाइन की पूजा करते हैं।
इस दिन ट्रेनों को केवल एक वाहन नहीं, बल्कि देवतुल्य मानकर उनका आभार व्यक्त किया जाता है कि वे साल के 365 दिन बिना रुके शहर को गतिमान रखती हैं।

गेंदे के फूल, रंगोली और सजतीं बोगियां

दशहरे की सुबह मुंबई के विभिन्न रेलवे स्टेशनों और लोकल बोगियों का नजारा पूरी तरह बदला हुआ होता है।
• सजावट: नियमित यात्रा करने वाले यात्रियों (डेली कम्यूटर्स) के समूह अपने स्तर पर ट्रेनों को सजाते हैं। लोकल के डिब्बों में खिड़कियों, दरवाजों, हैंडरेल्स और सामान रखने वाले रैक पर रंग-बिरंगे रिबन, झंडियां और गेंदे के फूलों (गेंदे के हार) की मालाएं लटकाई जाती हैं।
• पूजा-अर्चना: ट्रेनों के इंजनों और मोटराइज्ड केबिनों पर हल्दी-कुमकुम का तिलक लगाया जाता है। स्टेशनों के प्लेटफॉर्मों पर महिलाएं खूबसूरत रंगोली बनाती हैं।

मोटरमैन और रेलवे स्टाफ के प्रति आभार

दशहरा उत्सव का सबसे खूबसूरत पहलू इंसानी रिश्तों और कृतज्ञता की भावना है। मुंबई लोकल के मोटरमैन (ड्राइवर) और गार्ड, जो हर मौसम में लाखों यात्रियों को सुरक्षित उनके घर पहुंचाते हैं, उन्हें इस दिन विशेष सम्मान दिया जाता है।
यात्री ट्रेन के मोटरमैन को मिठाई और फूल भेंट करते हैं और तिलक लगाकर उनका अभिनंदन करते हैं। यह दृश्य दर्शाता है कि व्यस्त और भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच भी मुंबईकर उन लोगों के योगदान को कभी नहीं भूलते जो पर्दे के पीछे रहकर शहर की सेवा कर रहे हैं।

महिला डिब्बों में गरबा की धूम

नवरात्रि से शुरू हुआ उत्सव दशहरे के दिन अपने चरम पर होता है, विशेषकर लोकल ट्रेनों के महिला डिब्बों में।
• पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाएं चलती ट्रेन में और कल्याण, बदलापुर जैसे प्रमुख स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर गरबा खेलती हैं।
• पूरी यात्रा के दौरान लोकगीत और भजनों का दौर चलता है।
• यात्री आपस में घर से लाए हुए नाश्ता और मिठाइयां बांटते हैं। सह-यात्रियों का यह समूह, जो रोज एक साथ सफर करता है, त्योहार के दिन एक बड़े परिवार में तब्दील हो जाता है।

मुंबई लोकल ट्रेन में दशहरे का यह जश्न सिर्फ एक धार्मिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह मुंबई की ‘Mumbai Spirit’ और सामूहिकता का प्रतीक है। यह त्योहार सिखाता है कि किस तरह अपनी व्यस्त दिनचर्या और भागदौड़ के बीच भी खुशियों के पल तलाशे जा सकते हैं। ट्रेनों की गूंजती सीटी, गेंदे के फूलों की महक और यात्रियों की मुस्कान मिलकर हर साल मुंबई लोकल में दशहरे को एक यादगार और जीवंत अनुभव बना देती है।