रफ़ाकत के वो सब किस्से सुहाने याद आते हैं

रफ़ाकत के वो सब किस्से सुहाने याद आते हैं हमें अब भी मुहब्बत के ज़माने याद आते हैं रोज़ हँसता था महफिल में कभी दोस्तों के...

सुन लॉकडाउन, तू मुझे तोड़ नहीं पायेगा

माना की मैं कमज़ोर हूँ, तेरे डरने से डरा हूँ , पर इतना नहींं, की तू मुझे यूँही रौंद जायेगा, सुन लॉकडाउन, तू मुझे तोड़ नहीं...