भारतमाता की आजादी
गुड़िया झा
मै भारत माता केहलाती हु, मै पृथवी भी केहलाती हु, और धरनी भी केहलाती हु, आप सब जानते हो मुझ पृथवी के ग्रवग्रीह में घिरी हुई...
पत्रकारिता व साहित्य को सुखद रूप से जोड़ने वाली कृति है हेमलता त्रिपाठी की...
लखनऊ : गुड़िया को स्नेहिल बधाई, साहित्य में प्रगति के लिए शुभकामनाएं देते हुए आचार्य सत्येंद्र दास जी महाराज ने कहा
पत्रकारिता व साहित्य को सुखद...
विधा- कजरी—भारत की सच्ची आजादी।
(भारत की सच्ची आजादी नागपंचमी के पावन पर्व पर, स्वतंत्रता दिवस के आगमन पूर्व भारतवासी खुशहाल होकर इजहार करते हैं।)
अब त फहरी तिरंगा,सब प्रदेश...
रफ़ाकत के वो सब किस्से सुहाने याद आते हैं
रफ़ाकत के वो सब किस्से सुहाने याद आते हैं
हमें अब भी मुहब्बत के ज़माने याद आते हैं
रोज़ हँसता था महफिल में कभी दोस्तों के...
शिक्षक ही है भारत का सच्चा निर्माता
भारत में आदिकाल से गुरूओं का स्थान पूज्यनीय रहा है और आज भी है, लेकिन पहले जैसी श्रद्धा भक्ति नहीं है। गुरू ही तो...
संगीत साहित्य मंच हुआ संगीतमय और कवियों की सजी महफ़िल
ठाणे। सामाजिक, साहित्यिक व सांस्कृतिक संस्था संगीत साहित्य मंच की महफ़िल ठाणे में १२ जनवरी शनिवार की शाम सजी जो प्रशंसनीय रही। जिसमें विभिन्न...
दीपावली की मंगल बेला पर विलेपार्ले में सजी कवियों की काव्य संध्या
मुंबई । साहित्यिक संस्था काव्यकुंज की १११४वीं काव्यगोष्ठी दिनांक 27 अक्टूबर 2019 को पं. शिवप्रकाश जौनपुरी के मार्गदर्शन,श्रीमती संगीता अमलाडी जी(पूर्व उप प्रबंधक रिजर्व...
“पासबाने-ए-अदब” साहित्यिक संस्था में काव्यगंगा की धारा प्रवाहित हुई
नवी मुंबई : साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था पासबाने ए अदब एवं अस्मत सेवाभावी शिक्षण संस्थान के तत्वावधान में दिनांक 9 दिसंबर 2018 रविवार को तुर्भे नवी मुंबई...
निजी क्षेत्र के कर्मचारियों का शोषण आखिर कब तक
रिपोर्ट: राधेश्याम यादव
दैनिक जीवन में बढ रही महंगाई को सेठ और नौकर सभी कोसते रहते हैं और त्रासदी का रोना रहते हैं। क्या कोई...
नेह की उलझन मेघ में
क्या करूँ मैं, हे मेघा!
खुश होऊँ या शोक मनाऊँ,...
काल की बदरी!
चहु ओर फैली है,
इस बदरी को कैसे अपनाऊँ...
क्या करूँ मैं, हे मेघा!
खुश होऊँ या...















