व्यंगबाण – दल बदलू जी!
पूड़ी पैकेट बांट बांट कर, नेता हैं परेशान।
रखे किसका खाए किसका, जनता सोच हैरान।
जनता सोच हैरान, करूं क्या भाई?
बार-बार अंबर को देखे, कौन सी...
माई क पूत हंई सबनी, अब दूध क ऋण चुकावे के बाहे। महफिल—ए—गजल काव्य...
विनय शर्मा 'दीप'
मुंबई । कांदीवली -पूर्व में साहित्यिक मंच "महफ़िल ए ग़ज़ल' साहित्य समागम संस्था का स्थापना दिवस, विचार मंथन के साथ काव्य संध्या...
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की पुण्यतिथि एवं काव्य-रसिकों की सजी महफ़िल
मुंबई : युग प्रवर्तक आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी क़ी पुण्यतिथि सांताक्रुज (पूर्व) परम हॉउस के हाल में हिन्दी के प्रचार-प्रसार में रत संस्था 'युग प्रवर्तक...
ओंके ओ बव्वा – लघुकथा
राम आसरे सिंह
क्या हुआ ? अजीब सा शब्द लग रहा है ! वो इसलिए क्योंकि आपको आपकी नायिकाओं के नाम किसी ने बताये ही...
मैं कहां तुम पर कविता लिख सकती हूँ,
मैं कहां तुम पर कविता लिख सकती हूँ,
कोइ कविता कहाँ समा पायेगी तुम्हारे निष्छल सौंदर्य में,
मैं तो कविता लिखती हूँ, दूर गगन में बैठे...
“माँ” लघुकथा – वंदना श्रीवास्तव
मेरी गृहकार्य सहायिका सुमन बाई काम समाप्त करके थोड़ा सुस्ता रही थी। उसका पीला पड़ा काँति हीन चेहरा और उदास-निराश भाव भीतर तक मुझे...
अम्बेडकर ने मूल मनुस्मृति को स्वीकार किया था-स्वामी यज्ञदेव
वैदिक दर्शन प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में नारायण प्रकाशन वाराणसी से प्रकाशित गीत संग्रह 'तुम जलाना दीप बाती' का लोकार्पण किया गया।...
लघुकथा: सतत योग-अलका पाण्डेय
हमारे मोहल्ले में एक मात्र मेडिकल स्टोर था
मेडिकल स्टोर का मालिक अरुण बाबू बहुत ही रुखे स्वभाव के इंसान थे आजतक किसी से उन्होने...
जौनपुर के मजगवॉ कला में कवियों की सजी महफ़िल
जौनपुर (उ•प्र•)
राष्ट्रीय साहित्यिक सामाजिक व सांस्कृतिक संस्था काव्यसृजन उत्तर प्रदेश इकाई की मासिक काव्यगोष्ठी, इकाई के अध्यक्ष विनय अकेला जी के निवास स्थान मजगवॉकला...
क्या फर्क पड़ता है भाजपा जीते या कांग्रेस..!
दोनों पार्टियों ने पूरी निर्लज्जता के साथ जमकर एक दूसरे के घर में सेंधमारी की, और टिकिट के हवसीयों ने भी भरपूर उत्पात मचाया।
भाजपा...















