हमार पूर्वांचल

बात हमारे पूर्वांचल की

बात हमारे पूर्वांचल की, जिसने उठाने की ठानी है। हरि के रूप "हरिश सिंह" का ना ही कोई शानी है। उड़ान ए हौसले की, परवाज़ कभी...
hamara purvanchal

ज्वलंत मुद्दा: नारी कोई देह नहीं, यदि कपड़े छोटे हैं तो सोच छोटी है!

आज टीवी पर एक विज्ञापन देखा कि कपड़े छोटे नहीं होते सोच छोटी होती है, मैं भी कहती हूँ कि कपड़ें मत बदलो, समाज...

सिंधु साहित्य धारा व जीवन सौरभ के तत्वावधान में कवियों की सजी महफ़िल

मुंबई : सिंधु साहित्य धारा व जीवन सौरभ के तत्वावधान में मलाड में 15 दिसंबर को 'सिन्धुसाहित्य धारा' के अध्यक्ष आदरणीय मूलचंद निहलानी व...

मैं कहां तुम पर कविता लिख सकती हूँ,

मैं कहां तुम पर कविता लिख सकती हूँ, कोइ कविता कहाँ समा पायेगी तुम्हारे निष्छल सौंदर्य में, मैं तो कविता लिखती हूँ, दूर गगन में बैठे...

अनजान रिश्ता

हमारे जीवन में पारिवारिक रिश्तों के अलावा बहुत सारे नए रिश्ते बन जाते हैं। कोई पढ़ाई के दौरान मित्र बन जाता है तो पूरे...

व्यंग बांड़ – मामा नाम ही काफ़ी हैं

0
"मामा" नाम ही काफी है, लोगों को बतलाने को। केवल रात ही काफी है, नेताओं को आजमाने को। एड़ी चोटी एक किये सब, अब कुर्सी हथियाने...
हमार पूर्वांचल

निजी क्षेत्र के कर्मचारियों का शोषण आखिर कब तक

रिपोर्ट: राधेश्याम यादव दैनिक जीवन में बढ रही महंगाई को सेठ और नौकर सभी कोसते रहते हैं और त्रासदी का रोना रहते हैं। क्या कोई...

मुंबई के करीब मशहूर साहित्य प्रेमियो एवं रचनाकारो की सजी महफिल 

ठाणे : मीरा रोड पूर्व में प्रेमांजलि साहित्य संस्था के तत्वावधान में लक्ष्मण दुबे के निवास स्थान के प्रांगण में गज़लकार रवि केडिया के...

आज का गाँव परदेशी की नजर से

मैं और मेरा गाँव अतीत के आईने से गाँव की गलियों और बगीचों में खेत में, खलिहानों में खाली पड़े मैदानों में , खेलते कूदते अटखेलियां करते...

“माँ” लघुकथा – वंदना श्रीवास्तव

मेरी गृहकार्य सहायिका सुमन बाई काम समाप्त करके थोड़ा सुस्ता रही थी। उसका पीला पड़ा काँति हीन चेहरा और उदास-निराश भाव भीतर तक मुझे...