अपनी इच्छा के बलबूते जितना चाहूं जीना है मुझे

कर पर्वत को टुकड़े-टुकड़े, सागर को भी पीना है मुझे।। अपनी ईक्षा के बलबूते जितना चाहूं जीना है मुझे।। जीवन हो भले चार दिन का...

साहित्यिक संस्‍था काव्‍यकुंज की १११३ वीं मासिक काव्‍यगोष्‍ठी में कवियों ने बिखेरा जलवा

मुंबई। साहित्यिक संस्था काव्‍यकुंज की १११३वीं मासिक काव्‍यगोष्‍ठी हौंसिला प्रसाद अन्‍वेषी की अध्‍यक्षता व रमेश श्रीवास्‍तव जी के संचालन, अंजली टूर्स एण्‍ड ट्रावेल्स श्‍यामकमल...

प्रेस क्लब में ‘अलकनंदा’ पुस्तक विमोचित, वरिष्ठ साहित्यकारों ने सृजन को सराहा

अतिथियों ने नवोदित रचनाकारों से अपेक्षा की कि और भी सुन्दर लेखनी चलायें। साहित्य के गढ़ उत्तर प्रदेश के नवाबी शहर लखनऊ स्थित प्रेस...
हमार पूर्वंचल

हौसलों की उड़ान

जब भी तुम्हारा हौसला आसमान में जायेगा। होशियार रहना कोई पंख काटने जरूर आयेगा।                        ...

हाँ, तुम भी राम हो-हेमलता मिश्र “मानवी

कौन कहता है कि तुम राम नहीं हो - - क्या सिर्फ़ इसलिए कि नहीं गये हो वनवास चौदह वर्ष के लिए, पिता की आज्ञा पर। या...

चित भी मेरी पट भी मेरी-इंदु भोलानाथ मिश्रा

वाह जी वाह क्या सोच है तुम्हारी, हम सब पुरूषो में ये सोच कहा। क्या बात हैं, सच मन तो उछलने लगा है कि,...

सबके सहयोग बिना गंगा को निर्मल बनाना कठिन

संतोष कुमार तिवारी किसी भी वन्य जीव जन्तु को पालना गैरकानूनी है, नदियों की जैव विविधता बना़ये रखना हम सब की जिम्मेदारी है, यह बात...

वह छोटी सी बच्ची

कोमल मन और शांत सा चेहरा कुछ सकुचाता, शर्माता चेहरा । भगवान को मानने वाली और भावुक भी थी , अच्छा सीखने वाली और खूब खेलने...
हमार पूर्वांचल

भारतमाता की आजादी

गुड़िया झा मै भारत माता केहलाती हु, मै पृथवी भी केहलाती हु, और धरनी भी केहलाती हु, आप सब जानते हो मुझ पृथवी के ग्रवग्रीह में घिरी हुई...

नेह की उलझन मेघ में

क्या करूँ मैं, हे मेघा! खुश होऊँ या शोक मनाऊँ,... काल की बदरी! चहु ओर फैली है, इस बदरी को कैसे अपनाऊँ... क्या करूँ मैं, हे मेघा! खुश होऊँ या...